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विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ रथ यात्रा: जानिए रथों के विशेषताएं…

हरिपथभुवनेश्वर/पुरी16 जुलाई 2026 को विश्व के सबसे प्रसिद्ध रथ यात्रा प्रारंभ होगी। जिसमें जगत के नाथ महाप्रभु श्री जगन्नाथ माता सुभद्रा एवं भैया बलराम अपने अलग-अलग रथ में सवार होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देने एवं अपने मौसी माँ के यहाँ सफर पर जायेंगे। ये धार्मिक उसत्व ओडिसा एवँ छत्तीसगढ़ सहित देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

पूरी में बनने वाले  तीनो रथों के विशेषताओ के बारे में जानिये….

श्री जगन्नाथ जी का नन्दीघोष रथ

👉महाप्रभु जगन्नाथ का  रथ गरुड़ध्वज

जगन्नाथ जी का रथ ‘गरुड़ध्वज’ या ‘कपिलध्वज’ कहलाता है। 16 पहियों वाला यह रथ 13.5 मीटर ऊंचा होता है जिसमें लाल व पीले रंग के वस्त्र का प्रयोग होता है। विष्णु का वाहक गरूड़ इसकी रक्षा करता है। रथ पर जो ध्वज है, उसे त्रैलोक्यमोहिनी या नंदीघोष कहते हैं।

भैया बलराम का तालध्वज रथ

👉प्रभु बलराम का रथ  तालध्वज  बलराम का रथ तालध्वज के नाम से पहचाना जाता है। यह रथ 13.2 मीटर ऊंचा और 14 पहियों का होता है। यह लाल, हरे रंग के कपड़े व लकड़ी के 763 टुकड़ों से बना होता है। रथ के रक्षक वासुदेव और सारथी मताली होते हैं। रथ के ध्वज को उनानी कहते हैं। त्रिब्रा, घोरा, दीर्घशर्मा व स्वर्णनावा इसके अश्व हैं। जिस रस्सी से रथ खींचा जाता है, वह वासुकी कहलाता है।

माता सुभद्रा का दर्पदलन रथ

👉माता सुभद्रा का रथ पद्मध्वज या दर्पदलन  पद्मध्वज कहलाता है। 12.9 मीटर ऊंचे 12 पहिए के इस रथ में लाल, काले कपड़े के साथ काष्ठ के 593 हिस्सो का प्रयोग होता है। रथ की रक्षक जयदुर्गा व सारथी अर्जुन होते हैं। रथध्वज नदंबिक कहलाता है। रोचिक, मोचिक, जिता व अपराजिता इसके अश्व होते हैं। इसे खींचने वाली रस्सी को स्वर्णचूड़ा कहते हैं।

गौरतलब है,कि विश्व के एक मात्र भगवान है,जो वर्ष में एक बार श्री मंदिर से निकलकर अपने भक्तों को दर्शन देने आते है। लगभग पन्द्रह दिवसीय यह पर्व विख्यात के साथ आज भी लाखों श्रद्धालु बड़ी संख्या में जुटते है।

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