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एटीआर प्रबंधन ने ग्रीष्म ऋतु से पहले वन्यजीवों के पेजयल के लिए व्यापक तैयारी: 131 खाली (कृतिम ) सौसर में भरे जा रहे पानी…

हरिपथ: लोरमी-6 फरवरी अचानकमार टाइगर रिजर्व में ग्रीष्म ऋतु आने से पहले प्रबंधन ने वन्यप्राणियों के लिये 131 कृतिम (सौसर)  निर्माण कर जल भरने का शुरुआत कर दी है। पानी भरकर वन्यप्राणियों को जंगल में पेयजल के लिए भटकने की आवश्यकता नही पड़े इसके लिए प्रबंधन ने कारगर व्यवस्था किया है। जिससे वन्यप्राणी आसानी से पेयजल का इस्तेमाल कर सके। वनक्षेत्र में  400 से अधिक प्राकृतिक जलस्रोत उपलब्ध है।

एटीआर प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार अचानकमार टाइगर रिजर्व के कोर और बफर जोन के सभी वन परिक्षेत्र में बने सौसर में पानी की उपलब्धता एनटीसीए के मापदंड के अनुसार उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए विशेष रूप से प्रभारी भी बनाए गए हैं, जो मौके पर पहुंचकर वन्यप्राणियों के लिए उपलब्ध कराए गए पानी को देखेंगे। इन प्रभारियों से प्रतिदिन सभी सात रेंज के रेंजर जानकारी लेने के बाद उच्चाधिकारियों तक रिपोर्ट देंगे। इसके अलावा जीआईएस से भी टैंकर की जियो ट्रैकिंग कर समीक्षा भी की जाएगी।

फरवरी के पहले सप्ताह से दोपहर में गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरु कर दिया है। दोपहर की तेज धूप भीषण गर्मी के कारण पानी की जरूरत अधिक होने लगी है। इसमें सबसे अधिक समस्या वन्यप्राणियों को रहती है, जो जंगल में पानी नहीं मिलने के कारण गांव की ओर आ जाते हैं। वन्यप्राणियों के गांव में आने के बाद उनका शिकार भी हो जाता है। इसी तरह का हाल अचानकमार टाइगर रिजर्व में भी हो गया है। एटीआर के जंगल में पेड़ अधिक होने के कारण भीषण गर्मी से थोड़ी राहत तो है, लेकिन पानी की समस्या जंगल में भी होने लगी है। अचानकमार टाइगर रिजर्व के जंगल में मांसाहारी और शाकाहारी वन्यप्राणियों के पानी की समस्या को दूर करने के लिए 200 से 500 मीटर की दूरी के बीच सौसर भी बनाए गए हैं, जो वर्तमान में सूखने लगे हैं। सौसर में पानी नहीं होने के कारण जंगल के अंदर में रहने वाले वन्यप्राणी भी गांव की ओर आना शुरु हो गए हैं। इसकी वजह से एटीआर प्रबंधन को भी अब चिंता सताने लगी है। वन्यप्राणियों को होने वाली पानी की समस्या को दूर करने के लिए अब एटीआर प्रबंधन ने खाली हो रहे सौसर में टेंकर से पानी लाकर भरना शुरु कर दिया है, ताकि वन्यप्राणियों को भीषण गर्मी पानी के लिए इधर-उधर भटकने की आवश्यकता न पड़े और सौसर से उनकी प्यास बुझसके।

इसके अतिरिक्त एटीआर लोरमी के 914.017 वर्ग किलोमीट क्षेत्र में 400 से अधिक प्राकृतिक एवं कृत्रिम जलस्त्रोतों में ग्रीष्मकाल के पीक सीजन में जल उपलब्धता पूर्व सर्वेक्षित हैं।

131 सौसर अचानकमार टाइगर रिजर्व के कोर और बफर जोन में शाकाहारी और वन्यप्राणियों की संख्या काफी अधिक हैं। इसके साथ ही पिछले एक साल से प्रबंधन टाइगर और टाइग्रेस की संख्या में बढ़ोत्तरी का भी दावा कर रहा है। एटीआर में 7 वन परिक्षेत्र हैं, जिसमें चार कोर में और 3 बफर में बने रेंज में सभी वन्यप्राणियों को पानी उपलब्ध कराने के लिए 131 सौसर एटीआर में बनाए गए है। इसमें प्रति 3 दिन के अंतराल में टेंकर से पानी लाकर भरने का काम किया जा रहा है।

एटीआर के डिप्टी डायरेक्टर, यूआर गणेश ने बताया कि अचानकमार टाइगर रिजर्व के जंगल में वन्यप्राणियों को होने वाली पानी की समस्या को दूर करने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। एटीआर में 400 से अधिक प्राकृतिक जलस्रोत है। इसके अलावा 131 सौसर में टेकर से पानी लाकर भरने का भी काम हो रहा है।

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