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एटीआर में बाघों की गणना करने लगाए गए ट्रैप कैमरे…

हरिपथ लोरमी– 18 जनवरी अचानकमार टाइगर रिजर्व में एक बार शाकाहारी-मांसाहारी वन्यप्राणियों के अलावा बाघों की गणना के लिए ट्रैप कैमरा लगाना शुरु कर दिया गया है। इसके लिए प्रथम चरण की शुरुआत एटीआर के तीन रेंज अचानकमार, छपरवा और लोरमी बफर से की गई है। इस कार्य में देहरादून से भी प्रशिक्षण देने लोग पहुंचे हैं।

एटीआर में बाघों की गणना करने के लिए ट्रैप कैमरा लगाना शुरु कर दिया गया है। कैमरा लगाने से पहले एकत्रित करने के बाद उसकी जांच कर उसे ठीक भी कराया गया है। जानकारी के अनुसार अचानकमार टाइगर रिजर्व में चार साल में एक बार मुख्य गणना होती है। वहीं फोर फेस मानिटरिंग साल में दो बार की जाती है, जो नियमित प्रक्रिया है। इसे लेकर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से निर्देश भी दिए गए हैं, जिसके तहत एक गणना गर्मी और दूसरी ठंड के सीजन में की जाती है।

साल में दो बार होने वाली इस गणना के तहत पहले तीन दिन ट्रेल लाइन पर बाघों के पंजों के निशान आदि देखे जाते हैं, जिसके उपरांत तीन ट्रांजिट लाइन में वन अमला चलता है, जिसके उपरांत ही ट्रैप कैमरे से गिनती की जाती है। सबसे महत्वपूर्ण कैमरा ट्रैपिंग से गणना होती है।

कोर जोन में जितने स्थानों पर ग्रीन चिन्हिंत किए गए हैं वहीं कैमरे लगाए जाते हैं। टाइगर रिजर्व प्रबंधक ने तैयारी करने के बाद कैमरा लगाने की शुरुआत कर दी है। इसमें मुख्य रूप से आटोमेटिक फोटो क्लिक होंगे या नहीं, उसे भी लगाया गया है ताकि जब कैमरे के सामने से बाघ या अन्य वन्यप्राणी गुजरे तो उनकी फोटो कैद हो जाए। इस संबंध में जानकारी देते हुए एटीआर के डिप्टी डायरेक्टर यूआर गणेश ने बताया कि अचानकमार टाइगर रिजर्व में अखिल भारतीय बाघ आंकलन एआईटीआई का कार्य शुरु हो गया है।

एटीआर के अचानकमार, छपरवा और लोरमी बफर जोन में शुरू यह कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रति चार साल में समस्त टाइगर रिजर्व व वनमंडल में किया जाता है, जिससे समस्त परिक्षेत्रों में ट्रैप कैमरा लगाकर शाकाहारी व मांसाहारी वन्यप्राणियों की गणना एवं उनकी उपस्थिति की जानकारी प्राप्त की जाती है। इस कार्य में टाइगर सेल देहरादून के प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर एवं डब्लूडब्लूएफ से आए वरिष्ठ कर्मचारी उचित प्रशिक्षण प्रदान कर एआईटीआई कैमरा ट्रैपिंग कार्य में सहयोग दे रहे हैं। वर्तमान में 300 कैमरा अचानकमार, छपरवा और लोरमी बफर में लगा दिया गया है, जिसे 25 दिन बाद निकालकर डाटा कलेक्ट करने के उपरांत लमनी, केंवची, सुरही और कोटा बफर में लगाया जाएगा।

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