वन चेतना केंद्र में मानव-हाथी द्वंद्व नियंत्रण हेतु राज्य स्तरीय कार्यशाला…

हरिपथ:बिलासपुर– 19 फरवरी वन चेतना केंद्र, बिलासपुर में वन एवं जल वायु परिवर्तन विभाग और अचानकमार टाइगर रिज़र्व प्रबंधन द्वारा मानव-हाथी द्वंद्व को नियंत्रित करने एवं इसके वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ धर्मजीत सिंह, विधायक तखतपुर द्वारा किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने स्वयं को वन परिवार से जुड़ा बताते हुए वन एवं वन्यप्राणियों को क्षति पहुँचाने वाले अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे वनों एवं वन्यप्राणियों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। अचानकमार टाइगर रिज़र्व की प्रमुख उपलब्धियों एवं स्वैच्छिक ग्राम विस्थापन के संबंध में तैयार किए गए वीडियो का विमोचन मुख्य अतिथि द्वारा किया गया।

कार्यशाला की अध्यक्षता प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण पांडे द्वारा की गई। उन्होंने मानव-हाथी द्वंद्व को नियंत्रित करने हेतु जमीनी स्तर के कर्मचारियों से प्राप्त सुझावों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उनके अनुभवों के आधार पर प्रभावी रणनीति विकसित करने पर जोर दिया। मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर वृत्त, श्री मनोज कुमार पांडेय तथा वनमंडलाधिकारी, कटघोरा, श्री कुमार निशांत द्वारा ‘सजग ऐप’ के माध्यम से हाथियों की ट्रैकिंग एवं निगरानी की प्रणाली के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। रोजेक्ट एलिफेंट मॉनिटरिंग कमेटी, भारत सरकार के सदस्य श्री मंसूर खान ने अपने प्रस्तुतीकरण में वन्यप्राणियों के आवागमन के लिए प्रयुक्त वन क्षेत्रों को ‘वन्यजीव गलियारा (कॉरिडोर)’ बताते हुए इनके संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में सुरक्षित आवास, पर्याप्त चारा एवं स्वच्छ जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों में जनजागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि वन्यप्राणियों का आवागमन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बनाए रखना संरक्षण का मूल आधार है।

हाथी विशेषज्ञ प्रभात दुबे द्वारा छत्तीसगढ़ में जंगली हाथियों के मूवमेंट पैटर्न, मौसमी आवागमन, झुंड संरचना, एकल हाथियों (लोनर) तथा मस्थ हाथियों के व्यवहार पर आधारित वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने हाथियों को सैटेलाइट कॉलर लगाने की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि इससे वैज्ञानिक अध्ययन एवं बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलेगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य में चल रहे हाथी आवास विकास कार्यों से हाथियों का आवास बड़े एवं सुरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित होगा, जिससे मानव-हाथी द्वंद्व में स्वतः कमी आएगी।
सरगुजा वन मंडल अधिकारी अभिषेक जोगावत द्वारा सरगुजा वृत्त में मानव-हाथी द्वंद्व नियंत्रण हेतु किए जा रहे प्रयासों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात् एआई (AI) तकनीक के माध्यम से हाथियों की ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई।
डॉ. नवनीतन सुब्रमण्यम, डब्ल्यू.डब्ल्यू.एफ. इंडिया, कोयम्बटूर द्वारा अपने प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि भारत में अधिकांश हाथी संरक्षित क्षेत्रों के बाहर निवास करते हैं, जिसके कारण मानव-हाथी द्वंद्व की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने आवास विखंडन एवं आक्रामक वनस्पतियों को इसके प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कोयम्बटूर मॉडल के आधार पर हॉटस्पॉट मैपिंग, वैज्ञानिक विश्लेषण एवं ‘फील्ड मैनुअल 2022’ के अनुसार राज्य-विशिष्ट कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया।
मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी), रायपुर, सतोविशा समाझदार द्वारा संरक्षित क्षेत्रों एवं सामान्य वन मंडलों के बीच बेहतर समन्वय एवं सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला गया। मीतू गुप्ता द्वारा मानव-हाथी द्वंद्व नियंत्रण के प्रभावी उपायों पर प्रकाश डालते हुए सत्र के दौरान प्रस्तुत सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं का समेकन किया गया।

कार्यशाला में रायपुर, बिलासपुर एवं सरगुजा वृत्तों के क्षेत्रीय एवं वन्यजीव मुख्य वन संरक्षक, वानमंडलाधिकारीगण, अन्य वन अधिकारी, विशेषज्ञों एवं फील्ड स्टाफ की सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। यह कार्यशाला मानव-हाथी द्वंद्व के प्रभावी, वैज्ञानिक एवं समन्वित प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई। कार्यक्रम का समापन एवं आभार प्रदर्शन अचानकमार टाइगर रिजर्व के उप संचालक द्वारा किया गया।



