पामगढ़ में स्वामी शिवानंद का स्वागत में उमड़े भक्त,विधायक ने लिया आशीर्वाद

हरिपथ:पामगढ़– 16 अक्टूबर सिद्धबाबा अद्वैत परमहंस आश्रम के स्वामी शिवानंद महाराज का पामगढ़ स्थित श्री अद्वैत आश्रम में आगमन पर आश्रम परिसर श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठा। मंगल आरती, पुष्पवर्षा एवं मंगल कलश के साथ उनका भावपूर्ण अभिनंदन किया गया। रामकुटी में पधारने पर विधिवत गुरु पूजन कर श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा एवं समर्पण अर्पित किया। समूचा वातावरण गुरु महिमा के जयघोष और भक्तिमय भावों से गुंजायमान हो उठा।
इस अवसर पर पामगढ़ की विधायक शेषराज हरवंश ने स्वामी शिवानंद महाराज के दर्शन एवं पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
पामगढ़ स्थित श्री अद्वैत आश्रम, स्वामी शिवानंद महाराज से जुड़ी 36 आश्रमों की आध्यात्मिक परंपरा का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है। पूज्य श्री का पावन सान्निध्य श्रद्धालुओं के लिए गुरु भक्ति, आत्मचिंतन एवं आध्यात्मिक चेतना का अनुपम अवसर बना। उनके दर्शन एवं सत्संग से श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त किये।

अपने आध्यात्मिक उद्बोधन में स्वामी शिवानंद महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन का परम उद्देश्य आत्मतत्त्व का बोध प्राप्त कर परमात्मा से एकात्मता का अनुभव करना है। भगवान सदगुरु सोए हुए मनुष्यों को जगाने, उन्हें अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने तथा जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराने आते हैं। उनकी कृपा से ही जीव अपने भीतर निहित सत्य को पहचानकर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होता है। स्वामी जी ने कहा कि भगवान सदगुरु जीव के अज्ञानरूपी अंधकार को मिटाकर आत्मज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। नानक, कबीर, तुलसीदास एवं स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने भी गुरु महिमा को सर्वोपरि स्थान दिया है। सदगुरु का मार्गदर्शन जीवन को सही दिशा प्रदान करता है तथा साधना को सार्थक बनाकर मनुष्य को परम सत्य की अनुभूति की ओर ले जाता है।

मानव सेवा के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भूखे को भोजन कराना, जरूरतमंद की सहायता करना तथा पीड़ित जीव के प्रति करुणा रखना ही ईश्वर की सच्ची आराधना है। भूखे को भोजन कराकर उसकी क्षुधा शांत करना भी एक महान यज्ञ है, क्योंकि जीव की तृप्ति में भगवान नारायण की तृप्ति निहित है। सेवा, करुणा, परोपकार एवं सदाचार से युक्त जीवन ही सच्ची आध्यात्मिकता का परिचायक है।
इस दौरान शिवरीनारायण, जांजगीर, चांपा, बलौदाबाजार, मस्तूरी, अकलतरा, सीपत, बलौदा, जयरामनगर, बिलासपुर, मुंगेली, लोरमी, कवर्धा, कोरबा एवं कोटा सहित अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंचे।