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सुदूर वनांचल में गर्भवती महिलाओं के लिए बरसात बनी चुनौती: प्रशासन ने 52 महिलाओं को रखा निगरानी में 

हरिपथ:लोरमी◆ (विशेष खबर)6 अगस्त विकासखंड के अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) से लगे सुदूर वनांचल क्षेत्र में हर वर्ष चार माह का वर्षाकाल ग्रामीणों के लिए कठिन परीक्षा लेकर आता है। उफनती नदियों और नालों के कारण कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट जाता है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ती है, जिनके लिए समय पर अस्पताल पहुंचना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता। इसी स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन ने इस वर्ष क्षेत्र की 52 गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर विशेष निगरानी में रखा है तथा उन्हें प्रसव की संभावित तिथि से पहले सुरक्षित स्थान अथवा रिश्तेदारों के यहां रहने की सलाह दी गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे में यदि किसी गर्भवती महिला की अचानक तबीयत बिगड़ जाए या प्रसव पीड़ा शुरू हो जाए तो अस्पताल तक पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष अनेक परिवार बारिश शुरू होने से पहले ही अपने रिश्तेदारों के यहां अस्थायी रूप से रहने चले जाते हैं।

सबसे अधिक प्रभावित पंचायतें– अचानकमार, छपरवा, लमनी, कटामी, निवासखार, बोइरहा, महामाई एवं बिजरा कछार पंचायतों के गांव वर्षाकाल में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इन क्षेत्रों में सड़क संपर्क बाधित होने से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होती हैं।

इन गांवों में चिन्हित की गईं गर्भवती महिलाएं-स्वास्थ्य विभाग के अनुसार घमेरी (5), शांतिपुर (3), राजक (4), बाबूटोला (2), डंगनिया (3), कटामी (6), निवासखार (4), सिवलखार (2), सारसडोल (3), छिरहट्टा (2), बिरारपानी (3), रंजकी (2), बोइरहा (4), पटपरहा (2), औरापानी (2), सलगी (2), मंजुरहा (2), बिसौनिखार (2), सरसोहा (2) एवं परसहापारा (2) सहित कुल 52 गर्भवती महिलाओं को विशेष निगरानी में रखा गया है।

उफनती नदियां और नाले बनते हैं सबसे बड़ी बाधा- बारिश के दौरान मनियारी नदी, चितली नाला, कसनाई नदी, हमेहरा नाला, डुमरहा नदी, कर्रा नाला, करमा कछार नाला और चिमटापानी नाला तेज बहाव के कारण खतरनाक रूप ले लेते हैं। कई पुल-पुलियों के ऊपर पानी बहने लगता है, जिससे गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। इन क्षेत्रों में एंबुलेंस भी प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच पाती।

प्रशासन की विशेष निगरानी- प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा कार्यकर्ता, एएनएम एवं स्वास्थ्य अमले के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी की जा रही है। उच्च जोखिम वाली महिलाओं की सूची तैयार कर उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर भेजने और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही ग्रामीणों से भी अपील की जा रही है कि प्रसव की संभावित तिथि नजदीक होने पर जोखिम उठाने के बजाय पहले ही सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाएं। आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा के लिए जिला प्रशासन ने 6 सदस्ययी टीम खुड़िया में तैनात किया है। जो आपात स्थिति से निपटने शिविर किये है। 

वनांचल के ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से बरसात के दौरान यही स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक आधारभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं होगा, तब तक हर मानसून उनके लिए चिंता और संकट का कारण बना रहेगा।

बीएमओ डॉ जीएस दाऊ ने कहा की वनाचंल में पहुँचविहीन गाँव के 52 महिलाओं को निगरानी में रखा है, जिनकी स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य परीक्षण कराते है। उनको अविलम्ब चिकित्सा सुविधा के लिए जंगल बाहर रहने हिदायत दिया गया है। 

एसडीएम अजीत पुजारी ने कहा कि वनाचंलके गर्भवती महिलाओं का समस्या का मामला सज्ञान में आया है,प्रशासन इस और क्या बेहतर कर सकती है,इसका समीक्षा करेगी। 

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