चर्चित संगीता तिवारी हत्याकांड: दोषी पति को आजीवन कारावास, केसीसीन डालकर पत्नि को किया था आग के हवाले..

हरिपथ:मुंगेली–18 अप्रेल संगीता तिवारी हत्याकांड 27 गवाहों और 7 स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की गवाही और डाइंग डिक्लेरेशन के आधार पर पति को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। जिला एवं सत्र न्यायालय गिरिजादेवी मेरावी ने हत्याकांड में अपनी ही पत्नी को केरोसिन डालकर जिंदा जलाने वाले आरोपी पति पवन तिवारी को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

पूरे मामले में अभियोजन की ओर से वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों की लंबी फेहरिस्त पेश की गई थी। घटना 12 नवंबर 2023 की है, जब दीपावली त्यौहार के बीच ग्राम मसना सना के एक घर मातम फैल गया। आरोपी पवन तिवारी ने मामूली विवाद के बाद अपनी पत्नी संगीता तिवारी पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी थी, जिससे वह बुरी तरह झुलस गई। गंभीर रूप से झुलसी संगीता ने रायपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान 21 जनवरी 2024 को अंतिम सांस ली इस केस को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने कड़ी मेहनत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुल 27 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। चिकित्सकीय साक्ष्य मामले में 7 डॉक्टरों की गवाही अत्यंत महत्वपूर्ण रही। जिन्होंने संगीता की शारीरिक स्थिति, जलन के प्रकार और उसके होश में रहकर बयान देने की क्षमता की पुष्टि की। प्रमुखभूमिका इस प्रकरण में लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने मजबूती से शासन का पक्ष रखा।
विवेचक अखिलेश वैष्णव द्वारा की गई बारीकी से जांच और साक्ष्यों के संकलन ने केस को सजा तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका निभाई। गिरिजा देवी मेरावी ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि, मृतिका संगीता द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया मरणासन्न कथन सबसे पुख्ता सबूत है। संगीता ने मरते समय स्पष्ट किया था कि, उसके पति ने ही उस पर तेल डालकर माचिस जलाई थी। दोषी पति पवन तिवारी को धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई। वहीं दोषमुक्त साक्ष्यों के अभाव में मृतिका की सास और ससुर को रिहा किया गया।
बच्चों के लिए राहत न्यायालय ने मृतिका की दो अनाथ बेटियों के भरण-पोषण और शिक्षा के लिए पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत मुआवजा दिलाने का आदेश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दिया है।



