कारिआम में माता काली की स्वामी शिवानंद ने किया पूजन

हरिपथ:बेलगहना/ कारीआम– 18 अक्टूबर शारदीय नवरात्र की पावन सप्तमी तिथि पर श्री सिद्धबाबा अद्वैत परमहंस आश्रम, बेलगहना के स्वामी शिवानंद जी महाराज अपने परिकर सहित गणेशपुरी, कारीआम स्थित पावन आश्रम पहुंचे। यहां स्वामी जी ने भगवान स्वयंभू गणेश जी एवं मां आदिशक्ति काली जी का विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन कर ज्योति कलश के दर्शन एवं पूजन किए। मां भगवती और भगवान गणेश जी के श्रीचरणों में श्रद्धा निवेदित करते हुए पूज्य श्री ने सनातन धर्म की आराधना-परंपरा के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट की। इस पावन अवसर पर आश्रम का वातावरण भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण रहा।
प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण गणेशपुरी, कारीआम धार्मिक आस्था एवं आध्यात्मिक चेतना का विशिष्ट केंद्र है। बद्रीनाथ से रामेश्वरम जाने वाले प्रमुख मार्ग पर स्थित इस पावन धरा में मां आदिशक्ति काली जी एवं भगवान गणेश जी प्राचीन काल से विराजमान हैं, ब्रह्मलीन स्वामी सदानंद जी महाराज परमहंस के पावन चरण-रज से पवित्र हुई यह भूमि गुरु-कृपा, साधना और सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है। प्राचीन आराध्य स्वरूपों के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इसकी धार्मिक महत्ता को विशिष्ट बनाती है। वनांचल की सुरम्य छटा से आच्छादित यह तीर्थ साधना, शक्ति और शांति का अनुपम संगम है। यहां का प्राकृतिक वातावरण ग्रीष्म ऋतु में भी शीतलता और सुकून का अनुभव कराता है। नवरात्र की सप्तमी पर पूज्य स्वामी शिवानंद जी महाराज का अपने परिकर सहित आगमन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद का अवसर बना।

इसके पश्चात बस्ती डोंगरी स्थित पतंजलि आश्रम पहुंचे, जहां आयोजित भोजन-प्रसादी में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। सनातन संस्कृति में अन्नदान को महादान और जीव-सेवा को नारायण सेवा माना गया है। भूखे को भोजन कराकर तृप्त करना ही मानवता, करुणा और परोपकार का सच्चा स्वरूप है। सेवा और परोपकार की यह भावना भारतीय संस्कृति के मूल आध्यात्मिक आदर्शों को अभिव्यक्त करती है।
तदुपरांत पूज्य श्री ने जोगी गुफा आश्रम का भ्रमण कर वहां की स्थिति का निरीक्षण किया। जोगी गुफा प्राकृतिक वादियों की बीच में बसा बहुत मनमोहक शांत वादी है प्राकृतिक झरना का सुंदर दृश्य मानो पहाड़ से सुंदर दूध की धार बह रही हो यहां दूर दूर प्रकृति का आनंद लेने लोग पहुंचते रहते है। इसके बाद मानस तीर्थ सोनकुंड आश्रम पहुंचकर व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। पूज्य श्री का विभिन्न आश्रमों में आगमन एवं निरीक्षण आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण, साधना-परंपरा की निरंतरता और आश्रमों के सुव्यवस्थित संचालन के प्रति उनकी आत्मीयता को दर्शाता है।
भगवान सदगुरु की कृपा से प्रेरित जीवन श्रद्धा, समर्पण, सेवा और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। पूज्य श्री का यह मंगलमय प्रवास गुरु-तत्त्व के प्रति अटूट निष्ठा, सनातन संस्कृति के संवर्धन तथा लोककल्याण की भावना का प्रेरक संदेश बना। गुरु-कृपा से अनुप्राणित ऐसे आध्यात्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के अंतर्मन में भक्ति, सद्भाव और सेवा के संस्कारों को दृढ़ करते हैं।
इस अवसर पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरबा, पाली, रतनपुर, बिलासपुर, लोरमी, मुंगेली, कोटा, बेलगहना, पंडरिया सहित विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु भक्त भी पूज्य श्री के साथ पहुंचे। भक्तों ने भगवान सदगुरु के दर्शन-लाभ प्राप्त कर नवरात्र के पावन धार्मिक उत्सव में सहभागिता की। समूचा वातावरण श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण रहा।