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जिला सत्र न्यायालय:चरित्र शंका पर ग्रामीण की निर्मम हत्या करने वाले आरोपी को मिली उम्रकैद की सजा..

हरिपथ:मुंगेली/लोरमी– 20 अगस्त खुड़िया चौकी के ग्राम  ग्राम बहाउड में पत्नी को भगाने की शंका पर ग्रामीण की जानलेवा हमला कर उसकी हत्या करने तथा दूसरे ग्रामीण पर भी प्राणघातक हमला करने वाले आरोपी को सत्र न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 एवं 307 के तहत दोषी ठहराया। आरोपी को आजीवन कारावास एवं 500 रूपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

जिले के चौकी खुड़िया लोरमी थाना के वर्ष 2017 के बहुचर्चित हत्या एवं हत्या के प्रयास के मामले में सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी बलिराम पिता कन्हैया लाल, उम्र 35 वर्ष, निवासी बहौड़ा, चौकी खुड़िया, थाना लोरमी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 एवं 307 के तहत दोषी ठहराया है।

सत्र न्यायाधीश एवं पीठासीन अधिकारी श्रीमती गिरिजा देवी मेरावी ने 18 अगस्त को आरोपी को आजीवन कारावास एवं 500 के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन के अनुसार घटना 8 दिसंबर 2017 की रात्रि करीब 11 से 12 बजे के मध्य ग्राम बहाउड में रामरतन बैगा की बाड़ी के पास हुई थी। आरोपी बलिराम ने अपने पास शाल में छिपाकर रखी धारदार लोहे की टांगिया से बुधरू बैगा को आरोपी बलिराम ने इस घटना

पर जानलेवा हमला किया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। इसी दौरान आरोपी ने रामरतन बैगा को भी जान से मारने की नीयत से टांगिया से हमला कर उसके जबड़े में गंभीर चोट पहुंचाई। इस प्रकार आरोपी पर एक व्यक्ति की हत्या करने तथा दूसरे व्यक्ति की हत्या का प्रयास करने का आरोप था। प्रकरण में अभियोजन की ओर से न्यायालय के समक्ष कुल 18 गवाहों का परीक्षण कराया गया। अभियोजन के को अंजाम देने के पीछे बुधरू बैगा पर अपनी पत्नी को जबरन भगाने का आरोप लगाया था। इसी बात को लेकर आरोपी के मन में आक्रोश था और उसने कथित रूप से बुधरू पर जानलेवा हमला कर उसकी हत्या कर दी तथा रामरतन बैगा पर भी प्राणघातक हमला किया। मामले में प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान, आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त टांगिया की बरामदगी, रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट में टांगिया पर मानव रक्त की पुष्टि सहित अभियोजन द्वारा प्रस्तुत अन्य साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष रखा गया। इन साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी बलिराम को धारा 302 एवं 307 भादवि के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। शासन की ओर से लोक के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। शासन की ओर से लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ने प्रकरण में पैरवी करते हुए अभियोजन का पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

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