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विद्या वाचस्पति सारस्वत सम्मान: प्रभंजना को पीएचडी की उपाधि..

हरिपथ:मुंगेली30 जुलाई पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ द्वारा देश की राजधानी नई दिल्ली में बीते 26 जुलाई को राष्ट्रीय हिन्दी संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया।
हिन्दी को राष्ट्रभाषा की मान्यता हेतु सतत् प्रयासरत पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ , वृन्दावन धाम, मथुरा द्वारा नई दिल्ली के पांच सितारा होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित भव्य सम्मान समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वत जनों को मेडल , प्रशस्ति पत्र एवं शॉल ओढ़ाकर “विद्या वाचस्पति” एवं विद्या वाऱिधि सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मुंगेली निवासी बलदाऊ वैष्णव के सुपुत्री  प्रभंजना वैष्णव को योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान ,और अतुलनीय कार्य तथा विद्यापीठ के अधिकारियों के अनुशंसा पर विद्या वाचस्पति सारस्वत सम्मान जो मानद उपाधि पीएचडी के समतुल्य से सम्मानित किया गया।


समारोह का आयोजन रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ. अरविन्द कुमार के मुख्य आतिथ्य, विद्यापीठ के कुलपति डॉ. इंदुभूषण मिश्र “देवेन्दु” की अध्यक्षता, डॉ हरिभाई आर्यन एवं डॉ. नरेंद्र सिंह तोमर के विशिष्ट आतिथ्य में किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षाविद् एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्रुति कीर्ति सिंह उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया।
देश के विभिन्न प्रान्तों से आए हुए विद्वत जनों को सम्मानित करते हुए मुख्यअतिथि पद्मश्री डॉ. अरविन्द कुमार ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 343(1) के तहत हिन्दी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया गया है। संविधान में यह तय किया गया था कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्ज दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा की बढ़ती हुई लोकप्रियता को देखते हुए हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया जाना चाहिए।
संस्था के कुलपति डॉ. इन्दु भूषण मिश्रा ने बताया कि पं.दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ का यह सारस्वत सम्मान हिन्दी लेखन , शिक्षा के उन्नयन , पर्यावरण जागरूकता , चिकित्सा सेवा , योग क्रांति ,विधि सहायता एवं समाजसेवा के क्षेत्र में सम्मानित जनों की विशिष्ट उपलब्धियों के आधार पर मंचासीन अतिथियों द्वारा प्रदान किया जाता है ।
मुख्य वक्ता डॉ श्रुतिकीर्ति सिंह ने युवा पीढ़ी से हिन्दी भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करने तथा स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए योग प्राकृतिक चिकित्सा जैसे भारतीय संस्कृति अपनाने का आह्वान किया।
डॉ हरि भाई आर्यन ने धर्म पालन को सबसे महत्वपूर्ण बताया।
सम्मान समारोह में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों , चिकित्सक ,योगी ,लेखकों , शिक्षकों, साहित्यकारों एवं अन्य विद्वत जनों ने हिन्दी भाषा के उत्थान को लेकर अपने विचार प्रकट किए।
कार्यक्रम के अन्त में विद्यापीठ द्वारा अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन कशिश चावला ने किया।

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