ऑनलाइन फ्राडक्राईम /पुलिसन्यूजबिलासपुरविशेष खबर

म्यूल अकाउंट सिंडिकेट” पर पुलिस की दबिश: साइबर अपराध के “Sleeper Cells” बन चुके नेटवर्क के तीन आरोपी अंबिकापुर से गिरफ्तार..

हरिपथ:बिलासपुर– 17 मई “म्यूल अकाउंट सिंडिकेट” पर साइबर अपराध के “Sleeper Cells” बन चुके नेटवर्क के 03 आरोपी अंबिकापुर से गिरफ्तार किया गया। आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए खातों के विरुद्ध देशभर में 60 से अधिक साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज है। तीनों आरोपियों से 03 मोबाइल फोन जप्त, तकनीकी जांच जारी है।

गिरफ्तार आरोपी:
1. नवनीत मिश्रा उर्फ विक्की पंडित
पिता – संजय मिश्रा
उम्र – 19 वर्ष
निवासी – नवापारा, अंबिकापुर, थाना गांधीनगर, जिला सरगुजा (छ.ग.)
2. ऋषभ साहू
पिता – वीरेन्द्र साहू
उम्र – 24 वर्ष
निवासी – कम्पनी बाजार, अंबिकापुर, थाना कोतवाली, जिला सरगुजा (छ.ग.)
3. राजा घरानी
पिता – रंजन घरानी
उम्र – 22 वर्ष
निवासी – ग्राम डिगमा, नेहरू नगर, थाना गांधीनगर, जिला सरगुजा (छ.ग.) के खिलाफ थाना तारबाहर, जिला बिलासपुर में अप.क्र. – 155/2026 धारा – 318(4), 317(4), 3(5), 112 बीएनएस के तहत गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने मामले का संक्षिप्त विवरण किपूर्व में थाना तारबाहर पुलिस द्वारा दिनांक 13.05.2026 को म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले आरोपी दीपेश कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। आरोपी के मोबाइल फोन से प्राप्त महत्वपूर्ण तकनीकी इनपुट एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अंबिकापुर निवासी तीन संदेहियों – विक्की पंडित, ऋषभ साहू एवं राजा घरानी – की भूमिका सामने आई।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस टीम द्वारा तीनों संदेहियों को अंबिकापुर से हिरासत में लेकर थाना तारबाहर लाया गया तथा पूछताछ एवं मोबाइल फोन की तकनीकी जांच की गई।

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी दीपेश गुप्ता एवं गिरफ्तार तीनों आरोपी आपस में व्हाट्सएप एवं मोबाइल माध्यम से विभिन्न व्यक्तियों के बैंक खातों की जानकारी साझा करते थे तथा “म्यूल अकाउंट” नेटवर्क संचालित कर रहे थे।

प्रारंभिक तकनीकी विश्लेषण में यह भी पाया गया कि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों के विरुद्ध देश के विभिन्न राज्यों में 60 से अधिक साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हैं। इन खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने, ट्रांसफर करने एवं निकालने के लिए किया जा रहा था।

♦️ म्यूल अकाउंट सिंडिकेट : साइबर अपराध की “स्लीपर सेल” व्यवस्था: विवेचना में यह स्पष्ट हुआ है कि ऐसे म्यूल अकाउंट सिंडिकेट साइबर अपराधियों के लिए “Sleeper Cells” की तरह कार्य करते हैं। ये नेटवर्क सामान्य व्यक्तियों के बैंक खातों को कमीशन के बदले प्राप्त कर संगठित साइबर ठगी गिरोहों को उपलब्ध कराते हैं, जिससे करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की राशि देशभर में तेजी से ट्रांसफर एवं छिपाई जाती है।ऐसे खातों के माध्यम से वास्तविक साइबर अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है तथा जांच प्रभावित होती है।

♦️मोबाइल फोन जप्त, विस्तृत तकनीकी जांच जारी:प्रकरण में आरोपियों से 03 मोबाइल फोन जप्त किए गए हैं। जप्त मोबाइलों का तकनीकी परीक्षण कराया जा रहा है। साथ ही आरोपियों एवं उनसे जुड़े अन्य व्यक्तियों के बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन एवं नेटवर्क की विस्तृत जांच जारी है।तीनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।

Latest